आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
Aarti Kunj Bihari Ki
Janmashtami · Daily Krishna puja · Hindi
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला । गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली ॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
बजावै वेणु सुनावै मधुर स्वर, नंदलाल वृंदावन में । गोपियन संग रास रचावै, मन हरे सब वृंदावन में ॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं । गगन सों सुमन रासि बरसै । बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी । श्री राधिका प्यारी ॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
मगन ब्रज बाला मुरली धुन में, नंदलाल की छवि मन में । सकल सुख पावै जो कोई गावै, आरती कुंजबिहारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
॥ शुभं भवतु ॥


